Wednesday, 30 August 2017

हलाला प्रथा पर जनसत्ता के रविवारी में प्रकाशित शोध आलेख

27 अगस्त 2017 के अंक में 


कपिल कुमार गौतम को मिला तृतीय स्थान



            सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय, बारला, रायसेन के खेल विभाग द्वारा हाकी के महानतम जादूगर मेजर ध्यानचन्द्र की जन्मशती (राष्ट्रीय खेल दिवस, 29 अगस्त 2017) के अवसर पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया । जिसका थीम युवा और वर्तमान खेल परिदृश्य था । इसमें विश्वविद्यालय के कुल 11 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया । कार्यक्रम के अंत में परिणाम की घोषणा की गई जिसमें हिन्दी विभाग के एम.फिल. शोधार्थी कपिल कुमार गौतम को तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ । इस उपलब्धि पर उन्हें हिन्दी विभाग प्रभारी व समस्त विद्यार्थी/शोधार्थी द्वारा बधाई दिया गया । हिन्दी विभाग प्रभारी ने उन्हें भविष्य में ऐसे ही बढ़ते रहने की कामना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनायें दी । 

प्रस्तुति 
अनीश कुमार
पी-एच.डी. शोधार्थी 

Wednesday, 9 August 2017

विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में विचार संगोष्ठी का आयोजन

      आज दिनांक 09/08/2017 को हिंदी विभाग, साँची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय बारला, रायसेन में विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में विचार संगोष्ठी  का आयोजन किया गया । इसकी अध्यक्षता, हिंदी विभाग के प्रभारी डॉ. राहुल सिद्धार्थ द्वारा की गयी । कार्यक्रम का संचालन करते हुए पी-एच.डी शोधछात्र हिंदी अनीश कुमार ने कार्यक्रम की रुपरेखा बताई । सर्वप्रथम पी-एच.डी. हिंदी शोधछात्र रजत शर्मा ने आदिवासी समुदाय के प्रकृति से जुड़े होने की बात कही । वहीं पी-एच.डी. योगा शोधछात्र उमाशंकर कौशिक ने बताया आधिवासी समुदाय प्रकृति से जुड़ा हुआ समाज हैं । वह अपनी चिकित्सा के लिए आयुर्वेद का प्रयोग करते हैं । अगर आदिवासियों को समझना है तो हमें उनके बीच में जाना होगा ताकि उनकी मूल समस्यायों को समझा जा सके । पी-एच.डी. हिंदी शोधछात्र अशोक कुमार सखवार के द्वारा बताया गया आदिवासी समुदाय यहाँ के मूलनिवासी हैं, इनकों वनवासी, गिरिजन के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन आदिवासी अपने आप को आदिवासी कहलाना ज्यादा उचित मानते हैं । 


ये भारत के निम्नलिखित राज्यों जैसे- मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, राजस्थान, गुजरात और विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों में में निवास करते हैं । इनके अपने अनेक उपसमुदाय भी हैं जैसे- गोड, भील, सहरिया, गारो, खासी, नागा, कोरकू आदि । आदिवासी समुदाय प्रत्यक्ष रूप से जल, जंगल, जमीन से जुड़ा है । इनकी अपनी अलग धर्म, संस्कृति है, जिसे अभी तक सहेज कर रखे हुए हैं । भारत में उदारीकरण व भूमंडलीकरण के आगमन के पश्चात गलत सरकारी नीतियों के चलते धीरे-धीरे विकास के नाम पर उनकों जल, जंगल, जमीन से अलग किया जा रहा है । इस कारण उनका विस्थापन हो रहा है और वह मजदूरी करने के लिए मजबूर होते जा रहे हैं । पी-एच.डी. बौद्ध अध्ययन शेषनाथ वर्णवाल ने कहा भारतीय संविधान में आदिवासियों के लिए  पांचवी अनुसूची में विशेष प्रावधान दिया गया है । जिसे सरकार सही तरीके से लागू नहीं कर पा रही है । फिर भी आये दिन विकास के नाम पर उनको विस्थापित किया जा रहा है । उन्होंने बताया हम एक आदर्श समाज की कल्पना करते हैं कि ऐसा समाज हो लेकिन आदिवासी समाज वैसा है । झूठे विकास के नाम पर उनको प्रकृति से अलग नहीं किया जाना चाहिए । पी-एच.डी. हिंदी शोधछात्र अनीश कुमार ने कहा आदिवासी यहाँ के मूलनिवासी हैं उनकों समझने की जरुरत है । उन्होंने बताया आदिवासियों के नाम पर बहुत सारा साहित्य और शोध कार्य किया जा रहा है लेकिन उनकी मूल समस्याओं को अभी तक सामने नहीं लाया जा सका है । और उन्होंने बताया गैरआदिवासी लोग भी आदिवासी साहित्य सृजन कर रहे जो कि सहानुभूति परक साहित्य है, जिसे कुछ आदिवासी साहित्यकार आदिवासी साहित्य नहीं मानते हैं । उन्होंने आदिवासी भाषा, संस्कृति व उनकी परम्पराओं का भी एक संक्षिप्त परिचय दिया । पी-एच.डी. हिंदी शोधछात्रा सुनीता गुरुंग ने आदिवासी महिलाओं और लड़कियों के बारे में बताते हुए कहा कि उन्हें गुमराह कर यौन व्यवसाय में धकेल दिया जाता हैं । 


          पी-एच.डी. वैदिक अध्ययन शोधछात्रा चारू सिन्हा ने आदिवासी समुदाय की उन्नत ललित कलाओ की और ध्यान केंद्रित किया । एम.फिल. हिंदी शोधछात्र दिनेश कुमार ने आदिवासी कवितों के उद्धरण देते हुए आदिवासी समुदाय संस्कृति और कला को स्पष्ट किया और कविताओं के माध्यम से उनके ऊपर हो रहे हत्याचार को भी बताया । मुख्य वक्ता हिंदी विभाग अध्यक्ष डॉ. राहुल सिद्धार्थ जी ने वेदों में वर्णित आर्य-अनार्य को आदिवासियों से जोड़ते हुए बताया । आदिवासी समुदाय प्रकृति से प्रत्यक्ष से जुड़ा हुआ है । उन्होंने बताया आदिवासी समुदाय पहले से ही एक आदर्श समाज हैं । उन्होंने आदिवासी साहित्य लेखन के बारे में बताते हुए कहा आदिवासी और गैरआदिवासी दोनों के साहित्य लेखन को मान्यता दी जानी चाहिए । कौन सा साहित्य आदिवासी समुदाय के लिए अच्छा है, कौन सा नहीं ये निर्णय स्वयं पाठक करेंगे ।
          इस अवसर पर यू. जी. सी. के निर्देशानुसार भारत छोड़ों आन्दोलन के 75वें वर्षगांठ के उपलक्ष्य में सांप्रदायिकता, क्षेत्रवाद, भ्रष्टाचार, जातिवाद, आतंकवाद भारत छोड़ो का संकल्प उपस्थित सभी सहभागियों द्वारा लिया गया । धन्यवाद ज्ञापन शोधार्थी अनीश कुमार द्वारा किया गया ।
                                                                                                                  प्रस्तुति
   अशोक कुमार सखवार

पी-एच.डी. शोधार्थी

Friday, 4 August 2017

हिन्दी विभाग में मनाया गया मैथिलीशरण गुप्त की जयंती


          सांची बौद्ध भारतीय-ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग द्वारा हिन्दी साहित्य के मूर्धन्य साहित्यकार मैथिलीशरण गुप्त की जयंती का आयोजन दिनांक 03/08/2017 की सायं 4 बजे किया गया । इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विभाग प्रभारी डॉ. राहुल सिद्धार्थ द्वारा किया गया । कार्यक्रम के आरंभ में विभाग की पी-एच.डी. शोधार्थी सुनीता गुरुङ ने गुप्त जी के जीवन पर प्रकाश डाला तथा उनकी महिला विषयक लेखन को उद्धृत किया । एम.फिल. शोधार्थी दिनेश अहिरवार ने उनकी रचना यशोधरा को आज के समय से जोड़ते हुए उसकी प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे । पी-एच.डी. अशोक सखवार ने कहा कि गुप्त जी को राष्ट्र कवि का दर्जा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने दिया था । आगे कहा कि गुप्त गांधीवादी विचारधारा से प्रेरित होकर स्वाधीनता आंदोलन में बढ़चढ़ कर भाग लिया । उनकी साहित्यिक योगदान को देखते हुए भारत सरकार उन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित किया । विभाग के पी-एच.डी. शोधार्थी अनीश कुमार ने गुप्त के भाषाई दृष्टिकोण को स्पष्ट किए । उन्होने कहा कि गुप्त जी का खड़ी बोली के विकास में अद्वितीय योगदान है, जिसकी उन्हें प्रेरणा महावीर प्रसाद द्विवेदी से मिला । अनीश कुमार ने गुप्त जी की कविता ‘किसान’ का पाठ किया । मैथिलीशरण गुप्त साहित्य के लगभग सभी विधाओं पर अपनी कलम चलाई है । आगे चलकर भारत सरकार द्वारा उन्हें राज्यसभा का सदस्य भी मनोनीत किया गया । 

पी-एच.डी. शोधार्थी रजत शर्मा ने कहा कि उनकी रचनाओं को अतीत से वर्तमान में जोड़कर देखना चाहिए । इसके बाद विभाग के प्रभारी डॉ. राहुल सिद्धार्थ ने अपने आलेख के माध्यम से उनकी विभिन्न पंक्तियों का उल्लेख किये । कहा कि गुप्त जी की रचनाए कालजयी हैं । हमें उनकी रचनाओं की प्रासंगिकता को समझना होगा । उनकी रचनाएँ छायावाद के पूर्वपीठिका के रूप में दिखाई देती हैं । उन्होने भारतेन्दु युग की परिपाटी को तोड़ते हुए अपने रचनाओं को एक नया कलेवर प्रदान किए । जहां एक तरफ भारतेन्दु जी कहते हैं कि ‘रोवहु आवहु सब मिलि भारत भाई’ तो गुप्त जी इसके और आगे कहते हैं कि ‘आओ सब मिल  विचारे ये समस्याएँ सभी’ । इस प्रकार उनकी दूरदृष्टिता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है । विभाग द्वारा आयोजित इस तरह का पहला सफल कार्यक्रम था । इस दौरान विभाग के सभी शोधार्थी उपस्थित थे । इस दौरान विभाग में आयोजित की जाने वाली अन्य कार्यक्रमों की भी चर्चा की गई ।  
प्रस्तुति

अनीश कुमार
पी-एच.डी. शोध छात्र

Wednesday, 19 July 2017

विभिन्न हिन्दी शब्दकोश

1. अवधी शब्दकोश – सूर्यप्रकाश दीक्षित व सजीवनलाल यादव, विश्वविद्यालय प्रकाशन, लखनऊ, 1996
2. वाचिक कविता: अवधी – विद्यानिवास मिश्र, भारतीय ज्ञानपीठ, 2005
3. अवधी लोक कथाएँ – जगदीश पीयूष, लोकभारती प्रकाशन, 2004
4. प्रारंभिक अवधी – विश्वनाथ त्रिपाठी, राधाकृष्ण प्रकाशन, 1975
5. अवधी का विकास – बाबूराम सक्सेना, हिन्दूस्तानी एकेडेमी, इलाहाबाद, 1972
6. अवधी बृहत लोकोक्ति कोश – कमला शुक्ल, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ, 2002
7. अवधी लोकगीत: समीक्षात्मक अध्ययन – विद्याविंदू सिंह, परिमल प्रकाशन, 1983
8. अवधी लोकगीत और परम्परा – इन्दूप्रकाश पाण्डेय, प्रवीण प्रकाशन, दिल्ली, 1988
9. लोकगीतों में राम-कथा : अवधी – किरण मराली, साहित्य भवन, इलाहाबाद 1986
10. अवधी का विकास – बाबूरामसक्सेना, हिन्दूस्तानीअकादमी, इलाहाबाद, 1972
11. Evolution of Awadhi- Baburam Saksena, Motilal Banarsidas Publishers, 1971
12. अवधीकोश – रामज्ञद्विवेदी, हिन्दूस्तानीअकादमी, इलाहाबाद, 1955
13. पूर्वी अवधी: ग्राम्यशब्दावली – आत्मारामत्रिपाठी, आलोकप्रकाशन, इलाहाबाद, 2007
14. अवधी शब्द संपदा – हरदेवबाहरी, भारतीप्रेस, इलाहाबाद, 1982

Tuesday, 18 July 2017

हिन्दी पत्रिकाएँ

हिन्दी पत्रिकाएँ
मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
            हिन्दी पत्रिकाएँ सामाजिक व्‍यवस्‍था के लिए चतुर्थ स्‍तम्‍भ का कार्य करती हैं और अपनी बात को मनवाने के लिए एवं अपने पक्ष में साफ-सुथरा वातावरण तैयार करने में सदैव अमोघ अस्‍त्र का कार्य करती है। हिन्दी के विविध आन्‍दोलन और साहित्‍यिक प्रवृत्तियाँ एवं अन्‍य सामाजिक गतिविधियों को सक्रिय करने में हिन्दी पत्रिकाओं की अग्रणी भूमिका रही है।
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·         इतिहास
            हिन्दी पत्रकारिता की शुरुआत बंगाल से हुई और इसका श्रेय राजा राममोहन राय को दिया जाता है। राजा राममोहन राय ने ही सबसे पहले प्रेस को सामाजिक उद्देश्य से जोड़ा। भारतीयों के सामाजिक, धार्मिक, राजनैतिक, आर्थिक हितों का समर्थन किया। समाज में व्याप्त अंधविश्वास और कुरीतियों पर प्रहार किये और अपने पत्रों के जरिए जनता में जागरूकता पैदा की। राय ने कई पत्र शुरू किये। जिसमें अहम हैं-साल 1816 में प्रकाशित ‘बंगाल गजट’। बंगाल गजट भारतीय भाषा का पहला समाचार पत्र है। इस समाचार पत्र के संपादक गंगाधर भट्टाचार्य थे। इसके अलावा राजा राममोहन राय ने मिरातुल, संवाद कौमुदी, बंगाल हैराल्ड पत्र भी निकाले और लोगों में चेतना फैलाई। 30 मई 1826 को कलकत्ता से पंडित जुगल किशोर शुक्ल के संपादन में निकलने वाले ‘उदंत्त मार्तण्ड’ को हिंदी का पहला समाचार पत्र माना जाता है।[1]
इस समय इन गतिविधियों का चूँकि कलकत्ता केन्‍द्र था इसलिए यहाँ पर सबसे महत्‍वपूर्ण पत्र-पत्रिकाएँ - उद्‌दंड मार्तंड, बंगदूत, प्रजामित्र मार्तंड तथा समाचार सुधा वर्षण आदि का प्रकाशन हुआ। प्रारम्‍भ के पाँचों साप्‍ताहिक पत्र थे एवं सुधा वर्षण दैनिक पत्र था। इनका प्रकाशन दो-तीन भाषाओं के माध्‍यम से होता था। ‘सुधाकर' और ‘बनारस अखबार' साप्‍ताहिक पत्र थे जो काशी से प्रकाशित होते थे। ‘प्रजाहितैषी' एवं बुद्धि प्रकाश का प्रकाशन आगरा से होता था। ‘तत्‍वबोधिनी' पत्रिका साप्‍ताहिक थी और इसका प्रकाशन बरेली से होता था। ‘मालवा' साप्‍ताहिक मालवा से एवं ‘वृतान्‍त' जम्‍मू से तथा ‘ज्ञान प्रदायिनी पत्रिका' लाहौर से प्रकाशित होते थे। दोनों मासिक पत्र थे। इन पत्र-पत्रिकाओं का प्रमुख उद्‌देश्‍य एवं सन्‍देश जनता में सुधार व जागरण की पवित्र भावनाओं को उत्‍पन्‍न कर अन्‍याय एवं अत्‍याचार का प्रतिरोध/विरोध करना था। हालाँकि इनमें प्रयुक्‍त भाषा (हिन्‍दी) बहुत ही साधारण किस्‍म की (टूटी-फूटी हिन्‍दी) हुआ करती थी। सन्‌ 1868 ई. में भारतेंदु हरिश्चंद्र ने साहित्‍यिक पत्रिका कवि वचन सुधा का प्रवर्तन किया। और यहीं से हिन्दी पत्रिकाओं के प्रकाशन में तीव्रता आई।[2]
यहाँ प्रस्तुत है वर्तमान में भारत और विदेशों से प्रकाशित होने वाली महत्वपूर्ण पत्रिकाओं की सूची :
ऑनलाइन साहित्यिक पत्रिकाएं
हिंदी की साहित्यिक पत्रिकाएँ हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं के विकास और संवर्द्धन में उल्लेखनीय भूमिका निभाती रहीं हैं। कविता, कहानी, उपन्यास, निबंध, नाटक, आलोचना, यात्रावृत्तांत, जीवनी,आत्मकथा तथा शोध से संबंधित आलेखों का नियमित तौर पर प्रकाशन इनका मूल उद्देश्य है। आधुनिक हिन्दी में जितने महत्वपूर्ण आंदोलन छिड़े, पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से छिड़े। न जाने कितने महत्वपूणर्ण साहित्यकार पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से प्रतिष्ठित हुए। न जाने कितनी श्रेष्ठ रचनाएँ पाठकों के सामने पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से आईं। भारतेंदु युग के साहित्यकारों की केन्द्रीय पत्रिकाएँ थीं – ‘हरिश्चन्द्र मैगजीन’, ‘ब्राह्मण’ या ‘हिंदोस्तान’। द्विवेदी युग और स्वयं आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ‘सरस्वती’ उन दिनों की सर्वाधिक प्रतिनिधि पत्रिका थी। मैथिलीशरण गुप्त ‘सरस्वती’ की ही देन हैं। छायावादी कवियों के साथ ‘मतवाला’, ‘इंदु’, ‘रूपाभ’, ‘श्री शारदा’ जैसी पत्रिकाओं के नाम जुड़े हैं। माखनलाल चतुर्वेदी का साहित्य तो ‘कर्मवीर’ को जाने बिना जानी ही नहीं जा सकता। हिन्दी का प्रगतिशील साहित्य ‘हंस’ के पंखों पर चढ़कर नहीं आया। नई कविता की जन्मकुंडली ‘नए पत्ते’, ‘नई कविता’ जैसी पत्रिकाओं ने तैयार की।-- "वेब पत्रिका सृजनगाथा में डॉ. हरिसिंह गौर"
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दैनिक ऑनलाइन
सामाजिक-राजनीतिक पत्रिका
संजीव कुमार सिन्हा
प्रवक्ता.कॉम
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राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, खेल, मनोरंजन इत्यादि।
ऑनलाइन भारत
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सामाजिक और राजनीतिक
राम प्रकाश वर्मा
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साहित्यिक
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ऑनलाइन
साहित्यिक पत्रिका
डॉ श्रीमती तारा सिंह
स्वर्गविभा टीम, नवी मुंबई,
त्रैमासिक
साहित्यिक पत्रिका
अलीगंज, लखनऊ
दैनिक ऑनलाइन
सामाजिक-राजनीतिक पत्रिका
कनिष्क कश्यप
दैनिक ऑनलाइन
साप्ताहिक प्रिंट
साहित्य
डॉ सी जयशंकर बाबू

ऑनलाइन/ऑफलाइन विज्ञान पत्रिकाएं
पत्रिका का नाम जन स्वास्थ्य धारणा
समपादकीय पता राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान, मुनिरका, नई दिल्ली
वेब पता www.nihfw.org
ई मेल पता hindicell@nihfw.org
इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च, पी.ओ. बॉक्‍स नं. 4911, अंसारी नगर, नई दिल्‍ली-110029,
headquarters@icmr.org.in
नेशनल रिसर्च डेवलेपमेंट कार्पोरेशन, 20-22, जमरूदपुर सामुदायिक केन्‍द्र, कैलाश कॉलोनी एक्‍सटेंशन, नई दिल्‍ली-48
स्‍कोप कैम्‍पस, एन.एच.-12, होशंगाबाद रोड, भोपाल, म.प्र.,
राष्‍ट्रीय जल विज्ञान संस्‍थान, जल विज्ञान भवन, रूड़की-247667,
विज्ञान प्रसार, सी-24, कुतुब इंस्‍टीट्यूशनल एरिया, नई दिल्‍ली-दिल्‍ली-110016,
77, कैनाल रोड, शिव कालोनी, लखीमपुर खीरी- 262701, उ.प्र.,
डॉ. खुशाल सिंह पुरोहित, 19 पत्रकार कॉलोनी, रतलाम, मप्र 457001,
इमेज मीडिया ग्रुप, 518, हिंद नगर चौराहा, पुरानी चुंगी, कानपुर रोड, लखनऊ-226012
प्रधान संपादक : डॉ. राजीव रंजन उपाध्‍याय, संपर्क : भारतीय विज्ञान कथा लेखक समिति, परिसर कोठी काकेबाबू, देवकली मार्ग, फैजाबाद, (उ. प्र.)-224001,
सी.एस.आई.आर., डॉ. के। एस. कृष्‍णन मार्ग, नई दिल्‍ली-110012,
ऑनलाइन/ऑफलाइन महिला पत्रिकाएं[संपादित करें]
पत्रिका का नाम
संपादकीय पता
वेब पता
ई मेल संपर्क
के-25, पर्ल्‍स प्लाजा, सेक्टर-18, नोएडा-201301, उत्तर प्रदेश
संपादकीय एवं प्रशासकीय संपर्क : पायोनियर बुक कं0 प्रा0 लि0, सी-14, रॉयल इंडस्ट्रियल एस्‍टेट, 5-बी, नयागांव क्रॉस रोड, वड़ाला,मुम्बई-400031 (महाराष्ट्र)।
मित्र प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड, मुट्ठीगंज, इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
के-45, जंगपुरा एक्‍सटेंशन, नई दिल्‍ली-110014
जे-17, जंगपुरा एक्‍सटेंशन, नई दिल्‍ली-110014
दिशा भारती मीडिया प्रा.लि., ए-96, सेक्‍टर-65, 1 नोएडा-20130 उत्तर प्रदेश
info@dishabharti.com
जागरण प्रकाशन लि., 2, सर्वोदय नगर, कानपुर-208005, उत्तर प्रदेश
jagrancorp@jagran.com
13/14, आसफ अली रोड,नई दिल्‍ली-110002
मलयाला मनोरमा, पोस्ट बॉक्स नं 26, कोट्टयम-686 001,केरल, भारत
customersupport@mm.co.in

ऑनलाइन/ऑफलाइन फिल्‍मी पत्रिकाएं
हिंदी में करीब 75 फिल्मी पत्रिकाएं प्रकाशित हो रही हैं। छोटी-बड़ी सब मिलाकर कम से कम तीन दर्जन फिल्मी पत्रिकाएं तो अकेले दिल्ली से प्रकाशित होती हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से प्रकाशित होने वाली फिल्मी पत्रिकाओं के नाम इस प्रकार हैं-
चित्र भारती मासिक (कलकत्ता, 1955 से प्रकाशित), सिने चित्रा साप्ताहिक (कलकत्ता, 1955 से प्रकाशित), सिने वाणी सा. (बंबई, 1956 से प्रकाशित), कला संसार सा. (कलकत्ता 1957 से प्रकाशित), सिने सितारामा. (कलकत्ता, 1957 से प्रकाशित), रजत पट पाक्षिक (महू छावनी, 1957 से प्रकाशित), रसभरी मा. (दिल्ली से प्रकाशित), फिल्मिस्तान मा. (फिरोजपुर, 1958 से प्रकाशित), फिल्म किरण मा. (जबलपुर, 1959 से प्रकाशित), चित्र छाया मा. (दिल्ली, 1959 से प्रकाशित), इंदुमती मा. (दिल्ली, 1959 से प्रकाशित), सिने एक्सप्रेस सा. (इंदौर, 1959 से प्रकाशित), चित्रावली सा. (बंबई, 1959 से प्रकाशित), प्रीत मा. (जोधपुर, 1959 से प्रकाशित), नीलम मा. (दिल्ली, 1960 से प्रकाशित), मधुबाला मा. (दिल्ली, 1960 से प्रकाशित), मनोरंजन मा. (दिल्ली, 1962 से प्रकाशित), रस नटराज सा. (बंबई, 1963 से प्रकाशित), कजरा मा. (कानपुर, 1964), फिल्म अप्सरा मा. (दिल्ली, 1964), बबीता मा. (दिल्ली, 1967), सिने पोस्ट मा. (दिल्ली, 1968), फिल्म रेखा मा. (दिल्ली, 1968), फिल्‍मी कलियां मा. (दिल्ली, 1968), फिल्मांकन सा. (बंबई, 1969),सिने हलचल पा. (अजमेर, 1969 से प्रकाशित), अभिनेत्री पा. (लुधियाना, 1970 से प्रकाशित), फिल्म शृंगार मा. (दिल्ली, 1970 से प्रकाशित), फिल्मी परियां मा. (लखनऊ, 1970 से प्रकाशित), फिल्म संसार मा. (मेरठ, 1970 से प्रकाशित), फिल्मी कमल मा. (मेरठ, 1970 से प्रकाशित), फिल्म अभिनेत्री मा. (मेरठ, 1970 से प्रकाशित), पूनम की रात सा. (जबलपुर, 1970 से प्रकाशित), चित्र किरण सा. (बंबई, 1970 से प्रकाशित), सिने हलचल मासिक (दिल्ली, 1971 से प्रकाशित)।
इसके अलावा बंबई से प्रकाशित उर्वशी (पत्रिका), कलकत्ता से प्रकाशित स्क्रीन हैं। पाक्षिक केवल एक ही निकलती है, माधुरी। मासिक पत्रिकाओं में फिल्‍मी दुनिया, सुषमा पत्रिका, पालकी, फिल्‍मी कलियां, रंग भूमितथा चित्रलेखा (पत्रिका), राजधानी से प्रकाशित होती हैं और रजनी गंधा बंबई में। इन फिल्मी पत्रिकाओं के अतिरिक्त मेनका, युग छाया, नव चित्र पट, राधिका, फिल्मांजलि, छायाकार, प्रिया भी नियमपूर्वक प्रकाशित हो रही हैं। माधुरी को छोड़ शेष सभी फिल्मी पत्रिकाएं कथा-साहित्य प्रकाशित करती हैं। पालकी और आसपास में अच्छी फिल्मी सामग्री के अतिरिक्त अन्य कई विषयों पर भी सामग्री दी जाती है।[7]
कुछ फिल्मी पत्रिकाओं की जानकारी विस्तार से :
पत्रिका का नाम
संपादकीय संपर्क
वेब संपर्क
ई मेल संपर्क
संपादकीय सह प्रशासकीय संपर्क : 94, बनारसीदास एस्‍टेट, तिमारपुर (निकट माल रोड), दिल्‍ली-110004
संपादकीय सह प्रशासकीय संपर्क : 4675/21, अंसारी रोड, दरियागंज, नई दिल्‍ली-110002
संपादकीय सह प्रशासकीय संपर्क : 16, दरियागंज,नई दिल्‍ली-110002
ऑनलाइन/ऑफलाइन बाल पत्रिकाएं[संपादित करें]
पत्रिका का नाम
समपादकीय संपर्क
वेब संपर्क
ई मेल संपर्क
[बाल प्रभा]]
संपादकीय सह प्रशासकीय संपर्क श्री गाँधी पुस्तकालय, चौक, शाहजहांपुर उत्तर प्रदेश-242001
dr.nagesh.pandey.sanhay@gmail.com
संपादकीय सह प्रशासकीय संपर्क : 17/239, ज़ेड, 13/59, पंचनगरी, अलीगढ़-202001, उ.प्र.,
abhinavbalmann@gmail.com
संपादकीय सह प्रशासकीय संपर्क : ई-10, शंकर नगर, बीडीए कॉलोनी, शिवाजी नगर, भोपाल-462016
chakmak@eklavya.in
संपादकीय सह प्रशासकीय संपर्क : ऑफिस बी-3, लुनिक इंडस्‍ट्रीज, क्रास रोड ‘बी’, एम.आई.दी.सी., अँधेरी (ईस्ट), मुंबई-400093 (महाराष्ट्र)।
chandamama@chandamama.com
दिल्‍ली प्रेस भवन, ई-3, झंडेवाला एस्‍टेट, रानी झाँसी मार्ग, नई दिल्‍ली-110055,
article.hindi@delhipress.in
संपादकीय सह प्रशासकीय संपर्क : 40, संवाद नगर, इंदौर-452001 (मध्‍य   प्रदेश),
devputraindore@gmail.com
संपादकीय सह प्रशासकीय संपर्क : हिंदुस्‍तान टाइम्‍स हाउस, 18-20, कस्‍तूरबा गाँधी मार्ग, नई दिल्‍ली-10001,
nandan@livehindustan.com
6, द्वारिका सदन, प्रेस कॉम्‍पलेक्‍स, एम0पी0 नगर, भोपाल-11
संपादकीय सह प्रशासकीय संपर्क : उत्‍तर प्रदेश हिन्‍दी संस्‍थान, 6 महात्‍मा गांधी मार्ग, हजरतगंज,लखनऊ-226001
संपादकीय सह प्रशासकीय संपर्क : दिल्‍ली प्रेस भवन, ई-3, झंडेवाला एस्‍टेट, रानी झाँसी मार्ग, नई दिल्‍ली-110055,
article.hindi@delhipress.in
ऑनलाइन वेब पोर्टल
·        गद्य कोश[15]
·        रचनाकर[18]
·        लेखक मंच[20]
ऑनलाइन समाचार पोर्टल
मुक्तिबोध को जब कोई प्रकाशक छापने को तैयार नहीं था, तब ‘कल्पना’ और ‘वसुधा’ ने उन्हें पहचाना। आधुनिक काव्यशास्त्र का मूर्धन्य ग्रंथ ‘एक साहित्यिक की डायरी’ सबसे पहले ‘वसुधा’ में धारावाहिक रूप से छपा। नई कहानी का आंदोलन ‘नई कहानियाँ’ पत्रिका ने छेड़ा और प्रतिष्ठित किया। ‘सारिका’, ‘साक्षात्कार’, ‘पूर्वग्रह’, ‘दस्तावेज’, ‘पहल’, ‘वसुधा’, जैसी पत्रिकाएँ समकालीन साहित्य को जानने-समझने के लिए अनिवार्य हैं। हिन्दी में यदि पत्र-पत्रिकाएँ न होतीं तो बहुत सारा साहित्य छपने से रह गया होता या वक्त पर नहीं छप पाता।|"वेब पत्रिका सृजनगाथा में डॉ. हरिसिंह गौर"
·        इन.कॉम[27]
·        तहलका[29]
·        IBN खबर[36]
·        P7 न्यूज[37]
·        NDTV खबर[38]
·        आज तक[39]
सामाजिक पत्रिकाएँ
·        सारस सलिल
ऑनलाइन स्‍वास्‍थ्‍य पत्रिकाएं
ऑनलाइन वित्‍त पत्रिकाएं
·        मोल तोल[45]
इन्हे भी देखें
संदर्भ
1.   सृजनगाथा में ज़ाहिद खान का आलेख : प्रतिरोध के सामूहिक स्वर, परतंत्र भारत में प्रतिबंधित पत्र-पत्रिकाएँ
2.   [http://www.rachanakar.org/2009/09/blog-post_15.html वेब पत्रिका रचनाकार, वीरेन्द्र सिंह यादव का आलेख : हिन्‍दी साहित्‍य के इतिहास में पत्र-पत्रिकाओं की प्रासंगिकता एवं उपादेयता।
3.   वेब दुनिया, हिन्दी में गायत्री शर्मा का आलेख : गौरवशाली भाषा हिंदी
4.   Circulation as Claimed by Publisher for 2005-06
5.   Aanubhuti-A complete classic collection of Hindi Poetry
6.   Seemapuri Times - Hindi News Magazine: Social & Political Magazine
7.   1976 में वेद प्रकाश वैदिक द्वारा संपादित ग्रंथ हैं हिंदी पत्रकारिता, विविध आयाम में प्रकाशित लेख
8.   समाचार4 मीडिया नें आंकड़ों की जानकारी
9.   http://www.aksharparv.com/index.asp
10. http://www.anurodh.net/
11. http://urvashi.weebly.com/
12. http://www.kalayan.org/
13. http://www.abhivyakti-hindi.org/
14. http://kavitakosh.org/
15. http://www.gadyakosh.org/gk/
16. http://www.jankipul.com/
17. http://www.bhartiyapaksha.com/
18. http://www.rachanakar.org/
19. http://www.laghukatha.com/
20. http://lekhakmanch.com/
21. http://www.lekhni.net/index2.html
22. http://www.sahityakunj.net/
23. http://www.sahityashilpi.com/
24. http://www.hindikunj.com/
25. http://www.hindisamay.com/
26. http://www.parikalpnaa.com/
27. http://hindi.in.com/
28. https://news.google.com/news?ned=hi_in
29. http://www.tehelkahindi.com/
30. https://www.prabhasakshi.com/
31. http://www.bbc.co.uk/hindi/
32. http://www.mediavimarsh.com/[मृत कड़ियाँ]
33. http://raviwar.com/
34. http://hindi.webdunia.com/
35. http://shukrawar.net/
36. http://khabar.ibnlive.in.com/
37. http://www.p7news.com/
38. http://khabar.ndtv.com/
39. http://aajtak.intoday.in/
40. http://www.akshyajeevan.com/
41. http://www.nirogdhampatrika.com/
42. http://hindi.economictimes.indiatimes.com/
43. http://www.nafanuksan.com/
44. http://business.bhaskar.com/
45. http://www.moltol.in/hindi/
   बाहरी कड़ियाँ
“मलयालम पत्रिका, ‘वनिता’ 26.53 लाख पाठकों के साथ देश की सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली   पत्रिका हो गई है। हिंदी मासिक पत्रिका, ‘प्रतियोगिता दर्पण’ ने अपनी रीडरशिप में बढ़ोतरी की है। इसकी पाठक संख्या बढ़कर 20.27 लाख हो गई है। और इसने दूसरा स्थान बनाने में सफलता हासिल की है। इसी के साथ, तीसरे स्थान पर रही हिंदी पत्रिका, ‘सरस सलिल’ की पाठक संख्या में भी इजाफा हुआ है। इसकी पाठक संख्या अब 19.45लाख हो गई है। चौथे स्थान पर, अंग्रेजी साप्ताहिक पत्रिका, ‘इंडिया टुडे’ ने अपने कुछ पाठक खोये हैं। इसकी पाठक संख्या 17.57 लाख से घटकर 16.50 लाख रह गई है। पांचवें स्थान पर साप्ताहिक पत्रिका, ‘मलयाला मनोरमा’ 14.13 लाख पाठकों के साथ रही। जबकि, हिंदी साप्ताहिक पत्रिका, ‘इंडिया टुडे’ कुछ पाठकों की कमी के साथ छठे स्थान पर रही। इसकी पाठक संख्या घटकर 11.37 लाख रह गई है। ‘मेरी सहेली’ 11 लाख पाठकों के साथ सांतवें स्थान पर, ‘तमिल कुमदुम’ 10.66 लाख पाठकों के साथ आठवें स्थान पर, हिंदी पत्रिका, ‘गृहशोभा’ 10.61 लाख पाठकों के साथ नौवें स्थान पर और ‘गृह लक्ष्मी’ 10.31 लाख पाठकों के साथ दसवें स्थान पर रही।       ”
—"आईआरएस के 2011 के आंकड़ों के अनुसार"
https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80_%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%81

साभार विकिपीडिया 

हिन्दी विभाग में मनाया गया हिन्दी दिवस 14 सितंबर 2018

          सांची बौद्ध भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग द्वारा 12 से 14 सितंबर 2018 को हिन्दी दिवस दिवस के रूप में मनाया ग...